नये साल का चाँद

Moon

बस मे बैठ, खिड़की से, नये साल के चाँद को देख सोचता हूँ,
पिछले साल भी तो यह चाँद ऐसे ही दिख रहा था,
थोडा बहुत आकार मे अंतर है पर वही रंग, वही सूरत…
शायद यही फरक है चाँद और इंसान मे!

यह साल-दर-साल नहीं बदलता और
वो हर एक पल बदलता रहता है;
इसका रंग हमेशा श्वेत और वो हर दम रंग बदलता रहता है;
यह सीने मे हमेशा एक ही सूरत बसाए बैठा है,
वो वक़्त के साथ दिल के मेहमान बदलता रहता है!

पिछले साल भी कुछ लोगों को देखा बदलते हुए,
यह साल भी कुछ लोग हमे अपने दिल से उतार लेंगे;
यही होता आया है और यही होता रहेगा!

काश ऐसा ना होता;
काश इंसान इंसान नही चाँद होता!

All rights reserved @Nirlipta.

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