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तलाश

काली अंधियारी रात थी; आसमान मे चाँद नही था; आमावास की रात थी शायद! सड़कों पे बिजली के पुल तो थे, पर उसमे बत्ती गुल थी; लगता था, जैसे किसी शरारती बच्चे ने पत्थर फेंक उसे तोड़ दिया था! हाथ … Continue reading

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नये साल का चाँद

बस मे बैठ, खिड़की से, नये साल के चाँद को देख सोचता हूँ, पिछले साल भी तो यह चाँद ऐसे ही दिख रहा था, थोडा बहुत आकार मे अंतर है पर वही रंग, वही सूरत… शायद यही फरक है चाँद … Continue reading

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